गुमराह रात।

दिन ढला जब शाम आयी, कुछ अजब सी तकरार हुई।

धरती और आसमाँ के बीच, मन ही मन कुछ बात हुई।।

 चांदनी रात पर बादल चढ़ा,गुमराह अँधेरी रात हुई।

लगा गगन के आँखों से, फिर जमकर बरसात हुई।।


- नूर के दिल से....


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